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अवसाद के मिथक

जब तक मानसिक बीमारी के बारे में भ्रांतियां बनी रहेंगी, तब तक कलंक (शर्मिन्दगी) भी रहेगा। अवसाद, कला की तरह, कभी भी अकेले शब्दों में पर्याप्त रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता है, हालांकि शब्द कुछ न्याय कर सकते हैं और कला अनुपस्थिति को व्यक्त कर सकती है,