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Mobile Addiction

Mobile Addiction

 स्मार्ट फोन की लत को नोमोफोबिया कहा जाता है। फोबिया (डर) एक ऐसा डर कहीं मेरा फोन खो न जाए, अपने फोन के बिना न रहना ही नोमोफोबिया है। जिसमे व्यक्ति 10 मिनट भी अपने फोन के बिना नहीं रह पाता है   फोन की लत किसी आयु वर्ग तक  नहीं रही है युवा, बच्चे वा सभी बुजुर्ग इसका शिकार है। आजकल लोगो का जीवन मोबाइल केंद्रित हो गया है। आजकल लोग अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने रिश्तो से ज्यादा अपने फोन को देते हैं।उनकी दिन की शुरुआत फोन से होती है और रात को फोन चला कर ही सोते हैं। बच्चों की बात करे तो छोटे बच्चे फोन देख कर ही खाना खाना पसंद करते हैं, कार्टून देखते हैं वह घंटो फोन चलाते  हैं, और माता पिता भी बच्चों को भी busy रखने के लिए उन्हे फोन दे देते हैं।जिससे वे आरामपूर्वक अपना काम कर सकते हैं जब बच्चों में समस्याएं  पैदा होती  है, फोन के लती हो जाते है तो उन्हें ही मारते है । और सारा कसूर बच्चों पर ही डाल  देते हैं।

आज का युवा भी अपना सारा वक्त social media मे ही व्यतीत करना पसंद करते हैं। हर 5 मिनट में फोन चेक करना,Instagram, YouTube वा Facebook इनके बिना तो रह ही नहीं सकते हैं जिस से युवा पथ भ्रमित हो रहा है। वे अपने study मे focus करने में खुद को असमर्थ पाता है।  क्यूकी जब भी वे पढाई करना  चाहते हैं तो वे फोन के प्रति आकर्षित होते हैं। पढाई के बीच फोन चेक करने के लिए खुद को बाध्य पाता है, आजकल तो पढाई भी फोन पर ही होती है। फोन पर पढाई करते-करते वे कब social media तक पहुंच जाते हैं उन्हे खुद पता नहीं चलता जिसके कारण वे exam time में अच्छा perform ना कर पाने से anxious हो जाते हैं। और कुछ यही हाल हमारे बुजुर्गों का भी है।उनके पास भी बात करने के लिये कोई नही हैं तो वे भी अपना वक्त फोन पर ही बिताना पसंद करते हैं।

आजकल  लोग परिवार के बीच एक साथ हो फिर social gathering मे हो तब भी सभी अपने फोन पर ही लगे रहते हैं ।स्मार्टफोन , सोशल मीडिया और इंटरनेट की लत को फबिंग कहते हैं। आजकल लोग अपने रिश्तो को भी स्मार्टफोन वा social मीडिया के मध्यम से निभा रहे हैं।किस फंक्शन का इनविटेशन देना हो  whatsapp मे भेज दिया किसी को बधाई देना है तो मैसेज कर दिया etc.

पहले ऐसा नहीं होता था, मौका खुशी का हो तो लोग एक दूसरे से मिलकर celebrate करते थे। लेकिन आजकल लोग एक साथ हो तब भी बार-बार केवल अपना फोन ही चेक करते रहते हैं। किसी के साथ बातचीत करते वक्त या साथ में रहते हुए बार-बार फोन चेक करने की आदत को ही  फबिंग कहा है। जो लोग परिवार के व दोस्तो के बीच सोशल गैदरिंग में भी फोन पर ही रहते हैं फबिंग शब्द उन्ही के लिए है। इसका नकारात्मक प्रभाव सामाजिक, पारिवारिक जीवन वा मानसिक स्वस्थ पर भी पड़ता है।

●       अब जानते  हैं फब्बिंग की वजह से मानसिक स्वास्थ्य पर क्या बुरा प्रभाव पड़ता है-

 फबिंग की वजह से व्यक्ति रिश्तो से दूर हो रहा है। क्योंकि उनका सारा वक्त फोन वा इंटरनेट मे बिता रहा है उनकी बाहरी दुनिया मे क्या चल रहा है उन्हे कुछ पता ही नहीं चलता। रिश्तो वा सामाजिक तौर से दूरिया आने पर मानसिक बीमारियां पनपने लगती है जैसे:-

  1. चिंता (.Anxiety).
  2. नींद की कमी(insomnia).
  3. अवसाद (depression).
  4. अकेलापन(loneliness).

 

●       अब जानते हैं, की फोन कि लत को कैसे कम कर सकते हैं:-

 

1)अपने फोन को उठाने से पहले रुकिए वा सोचिए की आप किस  काम के लिये उठा रहे है। अगर बहुत जरूरी हो तभी फ़ोन को ले

 

 2) अपने फ़ोन की हद को सेट करे।

 

3) अपने फोन से उन एप्स को डिलीट कर दे जिसमे आपका ज्यादा से ज्यादा वक्त जाता है।

 

4) फोन पर एप्स की notification

को minimise करके रखिए।

 

5) अपने फोन को यदि आप घर पर है तो खुद से दूर रखिए।

 

6) सोने से पहले फोन को हाथ ना लगायें।

 

7) घर पर सभी के साथ जब भी भोजन करें तो फोन का प्रयोग न करें वा हो सके  सभी मिलकर खाने का या दिन भर की क्रियाकलापो की चर्चा करें।

 

8) फोन का कम से कम प्रयोग करे।

 

9) हो सके अपने दोस्तों व अन्य लोगो से मिलने के लिए जाए न की फोन पर बात करे।

 

10) सोशल गैदरिंग व फैमिली के बीच फोन का कम से कम प्रयोग करे।

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