धर्म क्या है

धर्म क्या है

धर्म क्या है? एक ऐसा सवाल जिसको लेकर लोगो में बहुत confusion है, तो आइए फ्रेंड्स इस पर चर्चा करते है और समझने की कोशिश करते है कि वास्तविकता में धर्म क्या है या धर्म किसे कहते है? 
 
फ्रेंड्स धर्म को आज हम लोग सिर्फ़ पूजा पाठ से रिलेट करके देखते है कि अगर हमने पूजा कर ली तो ये धर्म है या धर्म के कार्य करना है, लेकिन क्या धर्म वास्तव में कुछ घंटे की पूजा पाठ है?  
 
फ्रेंड्स जरा सोचिए, क्या सिर्फ़ पूजा करना वास्तविकता में धर्म हो सकता है? क्या हमेशा से धर्म की यही परिभाषा रही है? क्या धर्म का अर्थ मानव के बीच भेद भाव  करना है? 
 
नही... लेकिन आज हम मनुष्य होकर भी धर्म को पूरी तरह से समझ नही पाए है... 
वास्तव में धर्म सिर्फ़ ये नही है कि हमने भगवान के सामने पूजा अर्चना कर ली और  हमने अपने समय को सिर्फ़ इसी पूजा पाठ से बाँध लिया और खुश होकर मानने लगते है की हमने धर्म निभा लिया है.. 
 
फ्रेंड्स, धर्म का अर्थ विभेद करना नही है बल्कि सबको जोड़ कर रखना है... अर्थात मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है...और मानव सेवा एक दूसरे की सहयता करने से होती है...एक दूसरे के दुख तकलीफो को समझ कर दूर करने से होती है ना की धर्म के नाम पर भेद करने से....
हम लोगो का भगवान की पूजा करने के तरीके अलग हो सकते है पर इसका मतलब ये नही है कि हम इन तरीक़ो को धर्म समझ उसमे विभेद करने लगे... 
 
फ्रेंड्स ये सिर्फ़ उस सकारात्मक ऊर्जा  यानि भगवान को याद करने का तरीका है... जैसे  एक माता पिता के बच्चे एक जैसे नही होते उनमे कुछ ना कुछ  डिफरेन्स होता है लेकिन आख़िरकार वो एक ही माता पिता की संतान होते है.. ठीक इसी तरह हम जीव भी उसी एक परमात्मा की संतान है, हम भले ही भिन्न भिन्न रंग रूप , योग्यताओ ओर विशेषताओं को रखते हो पर वास्तव में सब एक ही परमात्मा की संतान है... सम्प्रदाय  के नाम पर जितने भी डिफरेन्सस आज समाज में है वो सब हमारे अपने बनाए हुए है , जिन्हे हम बिना अपना बुद्धि , विवेक  लगाए धर्म मान कर फॉलो करते आ रहे है ओर जिसकी वजह से हमने विभेद करना शुरू कर दिया और वो आज इतना बढ़ गया है कि लोग धर्म का सही अर्थ  ही भूलते जा रहे र्हे|  हमारा धर्म है जीव कल्याण | 
 
सम्प्रदाय और धर्म अलग अलग चीज़ है. धर्म जोड़ता है, और सम्प्रदाय  अलग करता है
 
धर्म सत्य का साथ देना है, धर्म प्रेम करना है, धर्म एक दूसरे के काम आना है, धर्म का अर्थ मंदिर या मस्जिद से नही है, धर्म का अर्थ कर्तव्य से है. धर्म का अर्थ अहिंसा से है, धर्म मुक्त करता है, जबकि सम्प्रदाय  बंधन में बांधता है |
अंत में मैं आपसे यही कहना चाहूँगी कि आप धर्म के सही अर्थ को समझने की कोशिश करे.. धर्म का अर्थ सदा से ही जीव कल्याण रहा है.. इसलिए आइए हम भेद भाव  करना छोड़कर मानव कल्याण से जुड़े,  जिससे सही अर्थ में मानव कल्याण फिर से सार्थक हो सके... धन्यवाद

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